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बजट 2026-27: ‘शी मार्ट’ से जीविका दीदियों को मिलेगा नया बाजार, बिहार बन सकता है महिला उद्यमिता का हब

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पटना: केंद्र सरकार ने बजट 2026-27 में स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं के लिए ‘स्वयं सहायता उद्यम मार्ट’ यानी शी मार्ट योजना की घोषणा कर महिला सशक्तिकरण को नई दिशा दे दी है। इस योजना का सबसे बड़ा लाभ बिहार को मिलने की संभावना जताई जा रही है, जहां जीविका दीदियों का मजबूत नेटवर्क पहले से मौजूद है। लखपति दीदी कार्यक्रम की उल्लेखनीय सफलता के बाद शी मार्ट को महिलाओं को उत्पादक से उद्यमी बनाने की दिशा में अगला बड़ा कदम माना जा रहा है।वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट भाषण के दौरान इस योजना का एलान करते हुए संकेत दिया कि अब गांवों में सीमित दायरे में काम कर रही महिलाएं राष्ट्रीय बाजार का हिस्सा बन सकेंगी। बिहार की वे महिलाएं, जो अब तक सिलाई, कढ़ाई, अचार, पापड़, मसाले और हस्तशिल्प जैसे उत्पाद घरेलू स्तर पर तैयार कर रही थीं, अब संगठित बाजार व्यवस्था के जरिए सीधे ग्राहकों तक पहुंच बना सकेंगी।इस योजना के लिए बिहार को मजबूत दावेदार माना जा रहा है, क्योंकि वर्ष 2006 से राज्य में जीविका स्वयं सहायता समूह सक्रिय हैं और उनका नेटवर्क लगातार विस्तृत हुआ है। वर्तमान में बिहार में 31 लाख से अधिक महिलाएं लखपति दीदी बन चुकी हैं, जो यह दर्शाता है कि राज्य की महिलाएं आर्थिक गतिविधियों को सफलतापूर्वक आगे बढ़ाने की क्षमता रखती हैं। यही वजह है कि शी मार्ट जैसी योजना के लिए बिहार को पहले से तैयार जमीन माना जा रहा है।शी मार्ट के तहत जीविका के क्लस्टर स्तरीय संघों को खुदरा बाजार उपलब्ध कराया जाएगा, जहां वे अपने उत्पाद सीधे बेच सकेंगी। इससे बिचौलियों की भूमिका कम होगी और महिलाओं की आय में सीधा इजाफा होगा। योजना का उद्देश्य महिलाओं को केवल कारीगर तक सीमित न रखकर उन्हें व्यवसाय की मालिक बनाना है।शी मार्ट एक ऐसा समर्पित प्लेटफॉर्म होगा, जहां स्वयं सहायता समूहों, महिला उद्यमियों, स्टार्टअप्स और ग्रामीण कारीगरों को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री का अवसर मिलेगा। कृषि, संबद्ध क्षेत्रों और लघु उद्योगों से जुड़े उत्पादों को संगठित रूप से बाजार तक पहुंचाया जाएगा। इसके साथ ही महिलाओं को ऋण, प्रशिक्षण, विपणन और ब्रांडिंग की सुविधा भी दी जाएगी, ताकि उनके उत्पाद स्थानीय सीमाओं से निकलकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान बना सकें।इस पहल से गांवों और कस्बों में स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और महिला नेतृत्व वाली अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। विशेषज्ञों का मानना है कि बिहार सरकार द्वारा पहले से चलाई जा रही जीविका योजनाओं के साथ यदि शी मार्ट को प्रभावी ढंग से लागू किया गया, तो यह राज्य की लाखों महिलाओं के लिए आर्थिक आत्मनिर्भरता और सामाजिक पहचान की नई राह खोल सकता है।

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